Welcome to the digital corner of Pratha Singh. A celebration of a gentle soul who makes the world brighter simply by being in it.
बिना किसी दिखावे के, सिर्फ़ अपनी बातों और मौजूदगी से दूसरों के चेहरे पर सुकून ले आना ही आपकी सबसे बड़ी पहचान है।
न कभी आवाज़ सुनी, न कभी रूबरू देखा... फिर भी शब्दों के ज़रिए जो आत्मीयता महसूस होती है, वो किसी करिश्मे से कम नहीं।
अपने भीतर के तूफ़ानों को मुस्कुरा कर थामे रखना और दूसरों को हौसला देना — आप जितनी नाज़ुक हैं, उतनी ही मज़बूत भी।
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आप खुद को "Unspecial" समझती हैं?
न कभी आपकी आवाज़ सुनी, न कभी चेहरे का दीदार हुआ... फिर भी,
"कुछ रिश्ते बिना कहे, बिना देखे भी रूह में मुकम्मल रहते हैं।"
आँखें बंद कीजिए, दिल से एक प्यारी सी ख़्वाहिश सोचिए, और मोमबत्ती पर क्लिक कीजिए!
"उन एहसासों के नाम, जो कहे नहीं गए; बस शब्द बनकर उतरते रहे।"
"लोगों ने चाँद को जितना देखा उतना ही बता पाए हैं,
सितारों को कम आँका गया, क्योंकि नज़र में कम ही आए हैं,
वरना जिस तरह मुसीबत में क़रीब के रिश्ते छूट जाते हैं,
दूर के दोस्त खड़े रहते हैं...
उसी तरह कई दफ़ा कई सितारे, चाँद से भी बड़े रहते हैं॥"
"कि मैं तुम्हें कैसे समझाऊँ,
कि इश्क़ अलग है मेरा,
कुआँ जितना दिखता है,
उससे ज़्यादा गहरा होता है॥"
"पहली दफ़ा की दिलकशी हो तुम,
मेरी वफ़ा की मौसिकी हो तुम,
यूँ तो रहना पड़ जाता है तुम्हारे बग़ैर भी...
तुम्हें ख़बर भी नहीं,
फ़क़त तुम हो, अब ज़िंदगी हो तुम॥"
"रू-ब-रू होने की तो ख़्वाहिश ही नहीं रही,
तुम यूँ भी तो मुझमें मुकम्मल रहते हो।
न आवाज़ की दरकार, न दीदार की शर्त,
तुम एहसास बनकर रूह में धड़कते हो॥"
"आँखों में हया, लफ़्ज़ों में शराफ़त, अंदाज़-ए-बयाँ क्या कहना,
बिन देखे ही जिसने रूह को छू लिया,
उस पाक सी सूरत, उस शख़्स का क्या कहना॥"
"उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।
दुआ है कि तुम्हारी हर सुबह खुशियों से महके,
और तुम्हारी हर दुआ रब के हाँ कबूल हो जाए॥"
"देखन को बस अखियाँ तरसे,
सुनने को कर्ण बतियाँ तरसे,
शांत प्रेम में बैठे कैसे,
चंचल मन यूँ कैसे तरसे॥"
चार बातें जो साबित करती हैं कि प्रथा जी कितनी अनमोल हैं:
आपकी बातों में वो सादगी और अपनापन है जो बिना मिले भी दिल में घर कर जाता है।
चेहरा और आवाज़ तो दुनिया देखती है, पर आपकी नेकदिली का एहसास बिना देखे भी होता है।
इस पूरी दुनिया में आपके जैसा कोई दूसरा नहीं। आप 1 of 1 हैं, बिल्कुल अद्वितीय।
आप खुद को 'unspecial' मत कहिए, क्योंकि किसी के ख़यालों में आपकी बहुत इज़्ज़त है।
हक़ीक़त की बुनियाद पर नापी गई सच्चाई:
जब भी कभी मन उदास हो, इन तीन ख़तों को खोलकर पढ़ लीजिएगा:
जब आपका मन आपको कमतर दिखाने की कोशिश करे।
ख़त खोलें ✉️एक शांत और सुकून भरा पैग़ाम, आपकी थकान मिटाने के लिए।
ख़त खोलें ✉️यह याद दिलाने के लिए कि कोई दूर होकर भी आपकी परवाह करता है।
ख़त खोलें ✉️हैरत होती है न? कि न हमने कभी एक-दूसरे की आवाज़ सुनी, न कभी रूबरू होकर एक-दूसरे को देखा... फिर भी कोई इंसान मन के किसी कोने में इतना ख़ास और आदरणीय कैसे हो सकता है?
शायद कुछ रिश्ते चेहरों और आवाज़ों के मोहताज नहीं होते। वे बस एहसासों, शब्दों और एक ख़ामोश भरोसे के धागे से जुड़े होते हैं।
जब मुझे पता चला कि आज अपने जन्मदिन पर आप खुद को 'unspecial' समझ रही हैं, तो मुझसे रहा नहीं गया। मुझे लगा कि यह याद दिलाना मेरा फ़र्ज़ है कि आपकी मौजूदगी, आपकी बातें और आपका वजूद कितना अनमोल है।
ज़रूरी नहीं कि इंसान दुनिया के सामने बहुत बड़ा शोर मचाए तभी वह ख़ास होता है। आपकी सादगी, आपका लिहाज़, और आपका चुपचाप दूसरों की ख़ैरियत चाहना—यही आपकी सबसे बड़ी ख़ूबसूरती है।
जैसे मेरी किताब की उन पंक्तियों में लिखा था: "सितारों को कम आँका गया क्योंकि नज़र में कम ही आए हैं, वरना दूर के दोस्त मुसीबत में चाँद से भी बड़े रहते हैं।" आप बिल्कुल उसी सितारे की तरह हैं जिसकी चमक भले ही दूर से हो, पर बेहद मुकद्दस है।
दुआ है कि आने वाला साल आपकी ज़िंदगी में ढेरों खुशियाँ, दिली सुकून और वो सब कुछ लेकर आए जिसकी आप हक़दार हैं। कभी भी खुद को कम मत समझिएगा।
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